विशेष संवाददाता मोहन मदवानी
कपिला गौ सेवा संस्थान की अनूठी पहल: बिलासपुर में ‘गोबर के कंडों’ से होगा होलिका दहन और पर्यावरण संरक्षण
बिलासपुर, छत्तीसगढ़:शहर की अग्रणी संस्था कपिला गौ सेवा संस्थान द्वारा पर्यावरण एवं गौ संरक्षण की दिशा में एक विशेष मुहिम की शुरुआत की गई है। इस पहल के अंतर्गत बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी की उपस्थिति में शहर के सभी आठ जोन, 70 पार्षदों और आम जनता से होलिका दहन में लकड़ी के स्थान पर देशी गाय के गोबर के कंडों (उपलों) का उपयोग करने की अपील की गई है।

मुख्य उद्देश्य: पर्यावरण और गौ-वंश का संरक्षण
संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती क्षमा सिंह ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल पेड़ों को कटने से बचाना है, बल्कि गौ-वंश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है।
जागरूकता अभियान: सभी आठ जोन के कमिश्नरों और 70 पार्षदों के माध्यम से वार्डों में कंडों के साथ पूजन सामग्री और जागरूकता पैम्प्लेट वितरित किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया अपील: महापौर ने जनता से अपील की है कि वे कंडों से होलिका दहन करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करें ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों।
मिट्टी की उर्वरता: होलिका दहन के बाद बची हुई राख को मिट्टी में मिलाकर उसकी खाद शक्ति बढ़ाने का वैज्ञानिक संदेश भी दिया जा रहा है।
मुक्तिधामों में भी कंडों का उपयोग
संस्थान ने एक दूरगामी निर्णय लेते हुए यह घोषणा की है कि होलिका दहन के पश्चात शहर के सभी मुक्तिधामों में शवदाह के लिए कंडों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
एक शवदाह के लिए लगभग 365 कंडों की आवश्यकता होती है। यदि हम लकड़ी की जगह कंडों का उपयोग करें, तो प्रतिवर्ष हजारों पेड़ों को जीवनदान दिया जा सकता है। श्रीमती क्षमा सिंह
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण
यह पहल ‘एकल गौ ग्राम योजना’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ रही है। गोबर से दीपक, धूपबत्ती और कंडे बनाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह प्राचीन रोजगार आधुनिक युग में गौ-वंश को सड़क से हटाकर गौशालाओं और घरों तक पहुँचाने का आधार बनेगा।
विशेषज्ञों और गणमान्य जनों के विचार
श्रीमती संगीता बनाफर (विश्व हिंदू परिषद): उन्होंने कहा कि मशीनीकरण के कारण बैलों की उपयोगिता कम हुई और वे सड़कों पर आ गए, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। गौ-आधारित कृषि ही हमारी असली धरोहर है।
श्रीमती प्रेमलता विन्ध्यराज (संस्था सदस्य): उन्होंने सामाजिक सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चारे का दान या सेवा कार्य कर गौशालाओं को मजबूत करना चाहिए।
आर.एस. विन्ध्यराज: इन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-संरक्षण से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और भूमि, जल व वायु की सुरक्षा होती है।
निष्कर्ष: ‘मातरः सर्व भूतानां, गावः सर्व सुखप्रदाः’
गाय केवल आस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन का आधार है। संस्थान की यह पहल ‘गौ सेवा ही हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का आधार है’ के संकल्प को सिद्ध करती है।



