ब्युरो रिपोट दिनेश आहुजा
छत्तीसगढ़ कोटवार संघ ने उठाई नियमितीकरण की मांग, मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
- महंगाई के दौर में पारिश्रमिक बढ़ाने और राजस्व विभाग में संविलियन की मांग
- मांगें पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोटवारों की वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया गया है। छत्तीसगढ़ कोटवार संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं तहसीलदार के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कोटवारों की ज्वलंत समस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग की है।

संघ के संरक्षक एवं सलाहकार एस.एल. कुर्रे ने बताया कि प्रदेश के कोटवार अंग्रेजी शासनकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासन, प्रशासन और आम जनता की सेवा में तत्पर हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्षों से लंबित इन मांगों पर शासन ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के कोटवार उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें एवं बिंदु:
- राजस्व विभाग में संविलियन और नियमितीकरण: संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए मांग की है कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके सभी अस्थायी कोटवारों को राजस्व विभाग में संविलियन कर नियमित शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। वर्तमान में सेवानिवृत्ति, मृत्यु या त्यागपत्र की स्थिति में कोटवारों को पेंशन, ग्रेच्युटी या किसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- महंगाई के अनुपात में पारिश्रमिक में वृद्धि: कोटवारों ने वर्तमान मानदेय को बेहद कम बताते हुए विभिन्न श्रेणियों के लिए निम्नलिखित मासिक पारिश्रमिक की मांग की है:
- A श्रेणी (बिना सेवा भूमि वाले): ₹6,000 से बढ़ाकर ₹15,000 किया जाए।
- B श्रेणी (1 से 7.50 एकड़ भूमि वाले): ₹5,500 से बढ़ाकर ₹12,000 किया जाए।
- C श्रेणी (7.50 से 10 एकड़ भूमि वाले): ₹4,500 से बढ़ाकर ₹10,000 किया जाए।
- D श्रेणी (10 एकड़ से अधिक भूमि वाले): ₹3,000 से बढ़ाकर ₹8,000 किया जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शोषण पर रोक: संघ ने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त या दिवंगत कोटवारों के परिजनों को प्राथमिकता देने के नियम की अनदेखी कर बाहरी लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। इसके साथ ही, शासन के निर्देशों के विपरीत राजस्व अधिकारियों द्वारा कोटवारों से उनके मूल दायित्वों के अलावा अन्य कार्य (बेगारी) कराए जा रहे हैं, जिस पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- एकतरफा कार्रवाई पर रोक: कई मामलों में झूठी शिकायतों के आधार पर बिना निष्पक्ष जांच और बिना कोटवार का पक्ष सुने सीधे निलंबन या पदमुक्ति की कार्रवाई कर दी जाती है। संघ ने मांग की है कि बिना विधिवत जांच और सुनवाई का अवसर दिए कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
- अन्य मांगें: नगरीय निकायों (नगर पालिका एवं नगर निगम) में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए और सभी कोटवारों को शासकीय सुविधाओं व सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए



