
रिपोर्टर — सुरज पुरेना
बिलासपुर न्यूज / प्रदेशभर में मितानिनें प्रशिक्षिका अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन मेहनत की कमाई उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही है। चार माह से क्षतिपूर्ति राशि लंबित रहने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। बच्चों का पालन-पोषण, घर का खर्च और जरूरी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
मितानिनें प्रशिक्षिका का कहना है कि सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लापरवाही बरती जा रही है। आंदोलन और ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं निकला। कई मितानिनें प्रशिक्षिका बताती हैं कि एक माह की वेतन न मिलने पर ही घर चलाना कठिन हो जाता है, ऐसे में चार माह से भुगतान न होने से हालात बेहद खराब हैं।

इसी समस्या को लेकर बुधवार को दर्जनों मितानिनें प्रशिक्षिका मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचीं और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वे 21 जुलाई 2025 को हुई प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन प्रशिक्षिका संघ की हड़ताल में शामिल नहीं थीं। इसके अलावा 7 अगस्त से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल में भी उन्होंने भाग नहीं लिया है। इसके बावजूद उनकी क्षतिपूर्ति राशि रोक दी गई है।
शहरी मितानिन प्रशिक्षिका (एम-टी) और क्षेत्र समन्वयक (ए.सी.) ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत आने वाली मितानिनों, बाल स्वास्थ्य मितानिन प्रशिक्षकों और क्षेत्र समन्वयकों का भुगतान शीघ्र किया जाए। उनका कहना है कि वे लगातार अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं, फिर भी चार माह से वेतन न मिलने से उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है और घर का खर्च संभालना बेहद कठिन हो गया है।
ज्ञापन सौंपने वालों में दुर्गा अहिरवार, संजू बेगन, दुर्गेश उयके, सावित्री दुबे, सुधा नागपुरे, रेखा यादव, ममता यादव, रेखा सूर्यवंशी, वंदना मिश्रा, सरस्वती साहू, रीना वर्मा और विजेता साहू शामिल थीं। मितानिनों प्रशिक्षिका ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे भी बड़ी हड़ताल के लिए बाध्य होंगी।